परिचय

कौमुदी: अपनी-अपनी रोशनी

प्रिय पाठक.

कहते हैं कि जो मनुष्य साहित्य सृजन का लाभ नहीं उठाता, उसे पढ़ता, लिखता या ग्रहण नहीं करता, वह जीवित तो रह सकता है परंतु उसका सम्पूर्ण जीवन अर्थहीन है। यह बात सच भी है क्योंकि प्रकृति के प्रारंभ से ही साहित्य ही मनुष्य का ऐसा साथी रहा जिसने प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से उसके जीवन को दिशा प्रदान करके, उसका मार्गदर्शन कर, उसके अस्तित्व को एक सार्थकता प्रदान की है। हजारों साल पहले गुफ़ाओं-कंदराओं की दीवारों पर आकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करने से लेकर आज लाखों किताबों को फोन पर अपनी उँगली तले पाने तक जितनी भी प्रगति हुई है, इसका लेखा-जोखा रख समाज का प्रतिनिधित्व करने का काम साहित्य ने ही किया है।

‘द कौमुदी’  भी एक ऐसी ही रचनात्मक पहल है, जोकि 12 जनवरी 2021 को स्वामी विवेकानंद जयंती व राष्ट्रीय युवा दिवस पर ‘कौमुदी’ ई-पत्रिका के रूप में सबके सामने आई थी। ‘कौमुदी’ का अर्थ है- चाँद की रोशनी, अर्थात चाँदनी, तथा ध्येय वाक्य ‘अपनी-अपनी रोशनी’ से हमारा तात्पर्य है कि यहाँ आपकी-हमारी, हम सबकी अपनी-अपनी रोशनी, अपनी-अपनी छोटी-सी हिस्सेदारी हो। अबतक की यात्रा में ‘कौमुदी’ को देश के विभिन्न क्षेत्र, विषय, संस्थान से साथ जुड़े कुछ युवाओं के सहप्रयास ने आगे बढ़ाया, जिसे अबतक आपलोगों का अत्यंत सहयोग मिला है। इसलिए हमें यह सूचित करते हुए अपार हर्ष का अनुभव हो रहा है कि एक मासिक ई-पत्रिका के रूप में निरंतर लेखक व पाठक वर्ग को लाभान्वित करने के बाद यह अब स्वतंत्र वेबसाइट www.thekaumudi.com के रूप में आप सबके सामने हाज़िर है।

‘द कौमुदी’ की इस वेबसाइट पर हमारी ई-पत्रिका तो होगी ही, साथ-ही-साथ आपको देश-दुनिया, घर-समाज, साहित्य से लेकर मनोरंजन तक के विभिन्न मुद्दों व विषयों पर लेख व अन्य रचनाओं को पढ़ने का अवसर भी मिलेगा। अभी यह अपने शुरुआती स्वरूप में है, जिसे आप सबकी सहायता से समयानुसार विस्तार देते हुए हम और अधिक सार्थकता प्रदान कर सकेंगे। यहाँ तक की यात्रा उतार-चढ़ाव भरी रही है, इसलिए आपका होना हमारे लिए और अधिक मायने रखता है। साथ बने रहने के लिए आप सबका बहुत-बहुत आभार। 

 आपकी अपनी 

– कौमुदी’