इधर चला मैं, उधर चला! जाने कहाँ मैं किधर चला?

महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने के अजीत पवार के फैसले से राज्य में एक बड़ा राजनीतिक असंतुलन पैदा हो गया है। पवार, जो राकांपा प्रमुख शरद पवार के भतीजे हैं, उन्होंने देखते-देखते दल-बदल किया और महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री पद पर जा बैठे। पाला बदलने के

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माय स्टेट इज़ बर्निंग! कृपया मदद करें: मैरीकॉम

पिछले दिनों दिग्गज मुक्केबाज मैरीकॉम ने ट्वीट कर गृह मंत्रालय एवं भारतीय प्रधानमंत्री से मदद माँगी, तब जाकर लोगों का ध्यान इस ओर गया कि देश का अभिन्न हिस्सा मणिपुर जल रहा है। मणिपुर में 03 मई को जातीय हिंसा की एक लहर भड़क उठी, जिस कारणवश अबतक कम-से-कम 100

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Odisha Train Accident: वह ट्रेन, जो अपने गंतव्य तक कभी पहुँची नहीं

सरकारें मदद तो पहुँचा रही, मगर मुआवज़े लोगों को लौटा सकें हैं भला? राजनीति तो उल्टे अपनी रोटियाँ सेंक उसपर घी लगा रही है।

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मात्र भाषा नहीं है मातृभाषा: अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

कुछ साल पहले एक सुबह अख़बार पलटते हुए नज़र पड़ी अंतिम पन्ने की एक ख़बर पर, जहाँ ज़िक्र था अफ्रीका के एक सुदूर द्वीप पर मौजूद एक व्यक्ति का, जोकि अपने कबीले का अंतिम रह गया था। उस व्यक्ति से सम्पर्क करने की भरसक कोशिशें की जा रही थीं, परन्तु

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आभासी दुनिया का शिकार होते बच्चे

बच्चे भविष्य की नींव है और भविष्य इस बात पर ही निर्भर करता है कि आज बच्चों का मानसिक, शारीरिक, सामाजिक विकास कैसा है? आज हर घर में बच्चे को जो सिखाया जाएगा, अपनी युवावस्था में वह उसी परम्परा को वह आगे बढ़ाएगा। यदि बच्चों को एक अच्छा परिवेश दिया

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लोकतंत्र में मतदान का सदुपयोग

यह बार-बार दोहराया जाने वाला एक कथन है कि हम एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं लेकिन क्या मतदान के अधिकार मिलने भर से हम लोकतंत्र का हिस्सा हो जाते हैं? इसका उत्तर है-‘नहीं।’ लोकतंत्र में सभी नागरिकों की जिम्मेदारी इससे कहीं अधिक बढ़कर है। हम सभी एक ऐसे शासन

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जीवन संगीत है

संगीत का विषय ऐसा है जिससे कोई भी व्यक्ति अछूता नहीं है। हम सभी किसी-न-किसी रूप में संगीत से जुड़े रहे हैं और वह हमारे जीवन का एक हिस्सा बन गया है। फसल कटाई, मंगल कार्यों तथा अन्य अवसरों से लेकर रोज़मर्रा के काम करते समय गुनगुनाने तक यह सर्वव्याप्त

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ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना

मनुष्य के सोचने-समझने की शक्ति ही उसे पशुओं और जड़ वस्तुओं से अलग बनाती है। मनुष्य न तो जानवरों की तरह अलग-अलग स्थानों पर जाने के बाद बिना विचार किए रह सकता है और न ही जड़ वस्तुओं की तरह एक स्थान पर रहकर पूरा जीवन बिता सकता है। हालाँकि,

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समाज का सिनेमा और सिनेमा से समाज

आज के दौर में अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम बनकर यदि कुछ उभरा है, तो वह फिल्में ही हैं। कारण यह कि सिनेमा ने समय-समय पर वैश्विक व सामाजिक स्तर पर खुद को न केवल विषय एवं प्रकृति के साथ विकसित किया, अपितु उसमें विषयानुरूप गतिशीलता भी प्रदान की। एक

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लोकतंत्र का लड़खड़ाता स्तम्भ ‘मीडिया।’

प्राचीन समय में सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने में जहाँ अधिक समय लगता था, वहीं वर्तमान में सेकेंड और मिनटों में सूचना का प्रसार होने लगा है। इतना ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व को एक छोटे से गाँव में बदलने और एक संस्कृति की ओर अग्रसर करने

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