कौन थे बेल्जियम के वह ईसाई पादरी कामिल बुल्के, जिन्होंने अपना जीवन भारतीय भाषा एवं संस्कृति को समर्पित कर दिया

कामिल बुल्के वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अपनी पीईएचडी थीसिस हिन्दी में की थी। रामायण पर पहला वैज्ञानिक शोध प्रस्तुत करने के साथ-साथ उन्होंने ‘अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोश’ के रूप में सबसे मानक शब्दकोश भी लिखा।

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स्त्री संघर्ष और मुक्ति का कठोर प्रश्न है ‘दिव्या।’

यशपाल के इस उपन्यास में नारी का नारीत्व कई बार छला गया- कभी दिव्या के रूप में, कभी दारा के रूप में, तो कभी अंशुमाला के रूप में, और अंत में वह स्वयं को समर्पित करके है आश्रय पाती है।

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सही मायनों में समाज का आईना है ‘औघड़।’

पढ़ते समय आप हॅंसते भी हैं, कई प्रसंगों पर आप बहुत गम्भीर भी होते हैं और अगर आप अधिक भावुक हैं तो आप आख़िरी प्रसंग पर रो भी सकते हैं।

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